

भारत का किसान न केवल अन्नदाता है, बल्कि उसने अपने संपूर्ण जीवन में राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता में अमूल्य योगदान दिया है। इसके बावजूद, आज वृद्धावस्था में किसान आर्थिक, सामाजिक एवं स्वास्थ्य असुरक्षा से जूझ रहा है।
यह मांग निम्नलिखित संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों पर आधारित है:
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह बार-बार प्रतिपादित किया गया है कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन, सामाजिक सुरक्षा, यात्रा, स्वास्थ्य एवं आर्थिक गरिमा भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं।
राज्य का यह दायित्व है कि वह अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर नागरिकों को वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता उपलब्ध कराए। 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों के लिए विशेष पहचान योजना इसी दायित्व का प्रत्यक्ष अनुपालन होगी।
किसान सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग में आते हैं। अतः राज्य पर यह संवैधानिक दायित्व है कि वह उनके हितों की रक्षा हेतु विशेष योजनाएं लागू करे।
जब वरिष्ठ नागरिकों, असंगठित श्रमिकों एवं अन्य वर्गों के लिए विशेष कार्ड/योजनाएं लागू की जा सकती हैं, तो वरिष्ठ किसानों के लिए पृथक “वनप्रस्थ कार्ड” न होना समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का भी उल्लंघन प्रतीत होता है।
1. 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी किसानों के लिए “वनप्रस्थ कार्ड” योजना तत्काल प्रारंभ की जाए।
2. उक्त कार्ड के अंतर्गत निम्न सुविधाएं विधिक रूप से सुनिश्चित की जाएं:
a. निःशुल्क या रियायती रेल/बस यात्रा (पैन इंडिया)
b. सरकारी अस्पतालों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा में प्राथमिकता
c. सरकारी योजनाओं में विशेष वरीयता (Priority Access)
d. वृद्ध किसानों की अलग पहचान और सम्मानजनक सामाजिक दर्जा
3. इस योजना को केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में लागू किया जाए, जिससे
सभी राज्यों में समान रूप से इसका लाभ मिल सके।
4. योजना के लिए स्पष्ट अधिसूचना (Notification) एवं समय-सीमा निर्धारित की जाए।
हम आशा करते हैं कि भारत सरकार इस विषय की गंभीरता को समझते हुए उचित समयावधि में आवश्यक विधायी/कार्यकारी कदम उठाएगी।